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Shimla News: महिलाओं को सिखाए जूट के उत्पाद बनाने, मशोबरा में चल रहा प्रशिक्षण कार्यक्रम
शिमला। मशोबरा में स्थित यूको आरसेटी (UCO RSETI) प्रशिक्षण केंद्र में महिलाओं को जूट के विभिन्न उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। रविवार 9 अगस्त 2026 को महिला प्रशिक्षुओं को जूट प्रकाश पेंसिल किट और कॉइन किट बनाने का हुनर सिखाया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्वरोजगार के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का विवरण
मशोबरा स्थित यूको आरसेटी के प्रशिक्षण केंद्र में शनिवार 8 अगस्त को जूट उत्पाद निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ था। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में 26 महिलाओं ने हिस्सा लिया है। प्रशिक्षक कांता ने पहले दिन महिला प्रशिक्षुओं को जूट उत्पाद निर्माण की प्रारंभिक जानकारी दी।
रविवार को प्रतिभागियों को किट ड्राफ्टिंग और निर्माण प्रक्रिया के हर चरण से अवगत कराया गया। व्यावहारिक सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों ने स्वयं किट बनाने का अभ्यास किया। प्रशिक्षक कांता ने बताया कि महिलाओं को जूट के विभिन्न उत्पाद बनाने सिखाए जा रहे हैं।
सिखाए जा रहे उत्पाद
प्रशिक्षण केंद्र में प्रतिभागियों को जूट से विभिन्न प्रकार के उत्पाद बनाने का कौशल सिखाया जा रहा है। इसमें शामिल हैं:
- जूट के बैग
- टोकरी
- सजावटी सामान
- मैट (चटाई)
- फाइल कवर
- पेंसिल किट
- कॉइन किट
- लैपटॉप बैग
- पाउच
- अन्य उपयोगी वस्तुएं
संवाद न्यूज एजेंसी के अनुसार, जूट से बने उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग है। इससे महिलाएं अपनी आय बढ़ाने के साथ आर्थिक रूप से सशक्त बन सकेंगी।
संस्था का उद्देश्य
यूको आरसेटी संस्था की निदेशक शबनम कोमल ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार के लिए तैयार करना है। समन्वयक प्रवीण शर्मा ने बताया कि जूट से बने उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग है।
इस प्रशिक्षण का लक्ष्य महिलाओं को पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरह के कौशल प्रदान करना है। प्रशिक्षण के दौरान सभी महिलाओं को वित्तीय साक्षरता का प्रशिक्षण भी निशुल्क दिया जाएगा। https://www.himcrafts.com/
पंजीकरण प्रक्रिया
मधुमक्खी पालन और जूट उत्पाद निर्माण के प्रशिक्षण के लिए पंजीकरण प्रक्रिया मशोबरा स्थित यूको आरसेटी के कार्यालय में सुबह 10:00 बजे से शुरू हुई। यह दोनों प्रशिक्षण कार्यक्रम यूको आरसेटी की ओर से निशुल्क आयोजित किए जा रहे हैं।
इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में 80 के करीब महिलाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। जूट उत्पाद निर्माण के लिए आवेदन वीरवार से स्वीकार किए जाएंगे।
जूट उद्योग का महत्व
जूट एक प्राकृतिक फाइबर है जो पर्यावरण के अनुकूल होता है। जूट के उत्पादों की मांग पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है क्योंकि लोग प्लास्टिक के बैग की जगह इको-फ्रेंडली विकल्प तलाश रहे हैं।
जम्मू में हाल ही में आयोजित हस्तशिल्प एवं हथकरघा प्रदर्शनी में भी जूट के बैग, पाउच और अन्य उत्पादों ने लोगों का ध्यान खींचा। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर आयोजित इस प्रदर्शनी में पारंपरिक कला के साथ आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए जूट उत्पादों की लोगों ने जमकर खरीदारी की।
महिला सशक्तिकरण की मिसाल
मीनू नामक एक महिला उद्यमी, जो कई वर्षों से जूट उत्पादों के क्षेत्र में काम कर रही हैं, ने बताया कि जूट के काम ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है। वह जूट के बैग, पाउच, लैपटॉप बैग सहित रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले कई उत्पाद तैयार करती हैं।
उन्होंने कहा कि वह अन्य महिलाओं को भी इस हुनर से जोड़कर उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही हैं। ‘वोकल फॉर लोकल’ से प्रेरित होकर शुरू किए गए इस काम के तहत कई समूह हैंडलूम और हस्तशिल्प आधारित उत्पाद तैयार कर रहे हैं।
अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम
यूको आरसेटी संस्था महिलाओं के लिए जूट उत्पाद निर्माण के अलावा अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित करती है। मधुमक्खी पालन के प्रशिक्षण के लिए भी पंजीकरण शुरू हुए हैं। https://shimlakhabar.com/
मधुमक्खी पालन से शहद और मोम जैसे उत्पादों का उत्पादन संभव होगा। जूट उत्पाद निर्माण से महिलाएं बैग, चटाई और सजावटी सामान बनाना सीखेंगी।
आर्थिक लाभ
जूट उत्पादों के निर्माण से महिलाओं को कई आर्थिक लाभ मिल सकते हैं:
- घर बैठे काम करने की सुविधा
- कम निवेश में व्यवसाय शुरू करना
- स्थानीय बाजार में अच्छी मांग
- पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों का निर्माण
- पारंपरिक कौशल का आधुनिक उपयोग
- स्वयं की इकाई स्थापित करने का अवसर
भविष्य की योजनाएं
संस्था की निदेशक शबनम कोमल ने बताया कि प्रशिक्षण के बाद महिलाओं को अपने उत्पादों की मार्केटिंग में भी मदद दी जाएगी। जिला प्रशासन जल्द ही इनके लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित करेगा ताकि महिलाएं अत्याधुनिक मशीनों का उपयोग और मार्केटिंग के नए तरीके सीख सकें।
खुशाला फेडरेशन की महिलाएं पहले से ही जूट और चीड़ से स्वरोजगार के उत्पाद बना रही हैं। अब उन्हें और अधिक प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराने की योजना है।
सफलता की मिसालें
आरसेटी ने पहले भी कई महिलाओं को जूट के उत्पाद बनाने की ट्रेनिंग दी है। एक कार्यक्रम में 27 महिलाओं को जूट के उत्पाद बनाने की ट्रेनिंग दी गई थी। इस अवसर पर आरसेटी के निदेशक अजय कुमार कतना ने मुख्य अतिथि, अन्य अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया।
चम्पावत में भी एसबीआई आरसेटी परिसर में 14 दिवसीय ‘जूट उत्पाद निर्माण’ प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इससे महिलाओं और युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिले हैं।
निष्कर्ष
मशोबरा में चल रहा यह जूट उत्पाद निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह प्रशिक्षण न केवल महिलाओं को नया कौशल सिखा रहा है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने में भी मदद कर रहा है।
यूको आरसेटी जैसे संस्थानों के प्रयासों से हिमाचल प्रदेश की महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और अपने हुनर को आय के साधन में बदल रही हैं। आने वाले दिनों में ऐसे और भी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे अधिक से अधिक महिलाएं लाभान्वित हो सकेंगी।













