Himachal Apple Growers Import Duty Crisis 2026: 50% से 25% हुई Duty, 2.5 लाख परिवारों पर खतरा

Himachal apple growers import duty crisis 2026 — सेब बागवान और आयात शुल्क कटौती का असर

स्थान: शिमला, हिमाचल प्रदेश | तारीख: 30 अप्रैल 2026 |


Himachal Apple Growers Import Duty Crisis 2026: 50% से घटकर 25% हुई Duty, 2.5 लाख परिवारों की आजीविका दांव पर

हिमाचल प्रदेश के सेब बागवानों पर एक बड़ा संकट मंडरा रहा है। Himachal apple growers import duty crisis 2026 उस वक्त और गहरा हो गया जब 27 अप्रैल 2026 को भारत और न्यूजीलैंड के बीच Free Trade Agreement (FTA) पर हस्ताक्षर हुए। इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड से आयातित सेब पर Basic Customs Duty 50% से घटाकर 25% कर दी गई है। Himachal apple growers import duty crisis 2026 का सबसे बड़ा खतरा यह है कि आयात की अनुमति अप्रैल से अगस्त के बीच दी गई है — ठीक उसी समय जब हिमाचल के बागवान अपनी फसल बाजार में उतारते हैं। Shimla Khabar की इस विशेष रिपोर्ट में जानें पूरा मामला और Himachal News में इसका क्या असर होगा।


Table of Contents


India-New Zealand FTA — Himachal Apple Growers Import Duty Crisis 2026 की जड़

27 अप्रैल 2026 को हस्ताक्षरित India-New Zealand Free Trade Agreement के तहत सेब आयात की नई शर्तें इस प्रकार हैं:

Himachal apple growers import duty crisis 2026 — सेब बागवान और आयात शुल्क कटौती का असर

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह समझौता हिमाचल के बागवानों के लिए दोहरी मार है — एक तरफ सस्ते आयातित सेब और दूसरी तरफ घरेलू बाजार में कीमतें गिरने का खतरा।


Himachal Apple Growers Import Duty Crisis 2026 — असली खतरा क्या है?

किसान संगठनों के मुताबिक सबसे बड़ी चिंता timing की है। अप्रैल से अगस्त का समय वही period है जब हिमाचल के CA storage से सेब बाजार में आते हैं और early season की फसल mandis पहुंचती है।

ऐसे में न्यूजीलैंड का सस्ता सेब एक साथ बाजार में आने से:

  • घरेलू सेब की कीमतें तेज़ी से गिर सकती हैं
  • CA storage facilities economically unviable हो सकती हैं
  • छोटे और सीमांत किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा
  • बागवानी में नया निवेश रुक सकता है

बागवान नेता बलविंदर गंकटू ने कहा कि किसान पहले से ही बढ़ती लागत और जलवायु परिवर्तन की मार झेल रहे हैं। अगर कीमतें और गिरीं तो कई बागवान अपने बाग छोड़ने पर मजबूर हो सकते हैं।


आंकड़ों में समझें — हिमाचल vs न्यूजीलैंड की उत्पादकता

अधिकारियों के मुताबिक दोनों देशों की apple farming में जमीन-आसमान का फर्क है:

पहलूहिमाचल प्रदेशन्यूजीलैंड
प्रति हेक्टेयर उत्पादन7-8 मीट्रिक टन50-70 मीट्रिक टन
सेब से आय₹4,500-5,500 करोड़ सालानाअरबों का निर्यात
निर्भर परिवार2.5 लाख
हॉर्टिकल्चर में योगदानलगभग 80%
Apple imports वृद्धि300% बढ़ी (10 साल में)

यह आंकड़े साफ बताते हैं कि न्यूजीलैंड की 7-8 गुना ज्यादा productivity वाले सेब से प्रतिस्पर्धा करना हिमाचल के छोटे बागवानों के लिए असंभव है।


बागवानों की मांगें — Himachal Apple Growers Import Duty Crisis में किसान क्या चाहते हैं?

किसान नेताओं और संगठनों ने केंद्र सरकार से इन मांगों को मनवाने की अपील की है:

  • सेब पर import duty को वापस 100% करने की मांग
  • अप्रैल-अगस्त (peak season) में सेब आयात पर पूर्ण प्रतिबंध
  • Minimum Import Price (MIP) की सख्त निगरानी
  • आयात कोटे की पारदर्शी monitoring
  • kiwi fruit पर import duty शून्य करने का फैसला वापस लेना
  • cold storage, grading और transport infrastructure में तुरंत निवेश
  • आधुनिक तकनीक और high-density farming को सरकारी सहायता

Shimla Impact — जिले के बागवानों पर Himachal Apple Growers Import Duty का सीधा असर

Shimla Impact की बात करें तो शिमला जिले के कोटखाई, रोहड़ू, थानेदार, रामपुर और जुब्बल इलाके हिमाचल के सबसे बड़े apple producing zones हैं। इन इलाकों में हजारों परिवार पूरी तरह सेब की खेती पर निर्भर हैं।

Congress MLA और AICC प्रवक्ता कुलदीप सिंह रथौर, जो थियोग विधानसभा क्षेत्र से हैं, ने इस मुद्दे को सबसे आक्रामक तरीके से उठाया है। उन्होंने राज्यपाल से मिलकर PM मोदी को urgent letter भेजा है।

शिमला जिले के बागवानों ने मांग की है कि जिला प्रशासन तुरंत सर्वे करे और केंद्र को नुकसान का आकलन भेजे।


CM सुक्खू और MLA रथौर ने क्या कहा?

CM सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मिलकर मांग की:

  • off-season में सेब पर 100% import duty लगाई जाए
  • peak production season में आयात पर पूर्ण प्रतिबंध हो
  • सेब को “Special Category” में रखा जाए
  • quantitative restrictions लगाई जाएं

MLA कुलदीप रथौर ने कहा कि April-August window में आयात की अनुमति देना जानबूझकर हिमाचल के किसानों को नुकसान पहुंचाना है। उन्होंने यह भी कहा कि kiwi पर duty शून्य करने का फैसला उन किसानों के लिए दोहरी मार है जिन्होंने हाल ही में सेब से kiwi की तरफ रुख किया था।


सरकार से क्या उम्मीद?

बागवान संगठनों ने साफ कहा है कि अगर केंद्र सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाए तो हिमाचल Pradesh में बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है। हिमाचल पंचायत चुनाव 2026 से पहले यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील है।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q1. India-New Zealand FTA में सेब पर duty कितनी घटाई गई?

50% से घटाकर 25% की गई है — Tariff Rate Quota (TRQ) के तहत।

Q2. न्यूजीलैंड का सेब कब आएगा भारत में?

अप्रैल से अगस्त के बीच आयात की अनुमति दी गई है।

Q3. पहले साल कितना सेब import होगा?

32,500 मीट्रिक टन — और यह 6 साल में बढ़कर 45,000 मीट्रिक टन हो जाएगा।

Q4. हिमाचल में कितने परिवार apple farming पर निर्भर हैं?

लगभग 2.5 लाख परिवार सेब की खेती पर निर्भर हैं।

Q5. Minimum Import Price क्या तय हुई है?

USD 1.25 प्रति किलोग्राम — लेकिन किसानों को डर है कि इसकी सख्त monitoring नहीं होगी।

Q6. CM सुक्खू ने केंद्र से क्या मांगा?

100% off-season import duty और peak season में पूर्ण आयात प्रतिबंध की मांग की।

Q7. बागवान kiwi को लेकर क्यों चिंतित हैं?

FTA में kiwi पर duty 33% से शून्य की जा रही है जिससे उन किसानों को नुकसान होगा जिन्होंने हाल ही में kiwi farming शुरू की। Apple import policy की आधिकारिक जानकारी के लिए भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय की वेबसाइट देखें।


निष्कर्ष

Himachal apple growers import duty crisis 2026 एक ऐसा संकट है जो सिर्फ किसानों का नहीं बल्कि पूरे हिमाचल की अर्थव्यवस्था का है। 2.5 लाख परिवार, ₹5,500 करोड़ की economy और 80% horticulture income — सब कुछ दांव पर है। केंद्र सरकार को तुरंत कदम उठाने होंगे। ताज़ा Shimla News और Himachal News के लिए Shimla Khabar से जुड़े रहें, अपनी राय कमेंट करें और इसे WhatsApp पर share करें।

👉 यह भी पढ़ें

Shimla Khabar — आपकी Shimla News और Himachal News की पहली पसंद।

Leave a Comment