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शिमला जिले में सेब उत्पादन 2026: मौसम की मार से आधी रह गई पैदावार, ऊंची कीमतों से किसानों को राहत
शिमला, 12 अगस्त 2026। हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े सेब उत्पादक जिले शिमला में इस साल मौसम की मार से सेब का उत्पादन पिछले साल की तुलना में लगभग आधा रहने का अनुमान है। प्रशासन के अनुसार इस साल जिले में महज 2.31 लाख मीट्रिक टन सेब उत्पादन होने की संभावना है, जो पिछले साल 4.41 लाख मीट्रिक टन की तुलना में काफी कम है।
उत्पादन में भारी गिरावट
जिला प्रशासन की वर्चुअल बैठक में उपायुक्त शिमला ने बताया कि बेमौसम वर्षा, ओलावृष्टि और मौसम के उतार-चढ़ाव के कारण इस साल सेब की पैदावार में भारी कमी आई है। हिमाचल प्रदेश में बागवानी विभाग के अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2026 में राज्य का सेब उत्पादन करीब 40 फीसदी तक घट सकता है।
राज्य में सामान्य वर्षों में करीब 7 लाख मीट्रिक टन सेब का उत्पादन होता है, लेकिन मौजूदा मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए वर्ष 2026 में यह घटकर करीब 4.36 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। यानी उत्पादन में करीब 2.63 लाख मीट्रिक टन की कमी आ सकती है।
बाजार में ऊंची कीमतें
उत्पादन में कमी के बावजूद, मंडियों में सेब की ऊंची कीमतों ने बागवानों को कुछ राहत दी है। शिमला मंडी में आज (12 अगस्त 2026) सेब के भाव निम्नलिखित हैं:
थोक मूल्य:
- न्यूनतम मूल्य: ₹10,000 प्रति क्विंटल
- अधिकतम मूल्य: ₹20,000-₹37,500 प्रति क्विंटल
- औसत मूल्य: ₹15,000-₹28,250 प्रति क्विंटल
खुदरा मूल्य:
- शिमला सेब: ₹130-₹169 प्रति किलो
- वॉशिंगटन सेब: ₹170-₹221 प्रति किलो
दिल्ली के आजादपुर मंडी में सेब के दाम 300-350 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं, जो हिमाचल से आधी रह गई आवक के कारण है।
गुणवत्ता बनी हुई है अच्छी
उत्पादन में कमी के बावजूद, सेब की गुणवत्ता अच्छी बनी हुई है। मंडी में उच्च गुणवत्ता वाले सेबों की मांग काफी अधिक है और इन्हें प्रीमियम मूल्य मिल रहे हैं। https://shimlakhabar.com/
शिमला जिले के पारंपरिक सेब बेल्ट रोहड़ू, जुब्बल, कोटखाई और कोटगढ़ में सेब अपनी मिठास और रंगत के लिए जाने जाते हैं। प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों के सेब में फल की मजबूती, स्वाद, चीनी की मात्रा और रंगत में सुधार देखा गया है।
किसानों को लाभ या हानि?
लाभ के पहलू:
- मंडी में ऊंची कीमतें (₹15,000-₹28,250 प्रति क्विंटल) किसानों को राहत दे रही हैं।
- उच्च गुणवत्ता वाले सेबों को प्रीमियम मूल्य (₹37,500 तक) मिल रहे हैं।
- प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को लागत में 56.5% तक की कमी और बेहतर मूल्य मिल रहे हैं।
हानि के पहलू:
- उत्पादन में 40-50% की भारी गिरावट से कुल आय में कमी आई है।
- मजदूरों की बढ़ती दिहाड़ी (₹900 प्रतिदिन तक) से उत्पादन लागत बढ़ गई है।
- जलवायु परिवर्तन के कारण शिमला में सेब उत्पादन वृद्धि दर में 3.70 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
परिवहन और विपणन व्यवस्था
सेब सीजन-2026 के सफल संचालन को लेकर उपायुक्त शिमला ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने परिवहन, मालभाड़ा, श्रमिकों की उपलब्धता, नियंत्रण कक्ष और यातायात व्यवस्था को लेकर व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं।
एक महत्वपूर्ण पहल के तहत, हिमाचल की सेब-सब्जियां अब रेल से देशभर की मंडियों में पहुंचेंगी। इससे गुणवत्ता प्रभावित नहीं होगी और बागवानों को नुकसान से बचाया जा सकेगा। यह पहल हिमाचल प्रदेश की करीब 5,500 करोड़ रुपये की सेब अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
नौणी विश्वविद्यालय के अध्ययन में सामने आया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमाचल प्रदेश में सेब उत्पादन का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। राज्य के पारंपरिक सेब उत्पादक क्षेत्र शिमला में उत्पादन वृद्धि की रफ्तार घट रही है, जबकि सिरमौर, स्पीति और मंडी जैसे नए क्षेत्रों में सेब की पैदावार तेजी से बढ़ रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार बदलती जलवायु, असमान वर्षा, उत्पादन लागत में वृद्धि और पारंपरिक बगीचों की सीमाएं इसके पीछे प्रमुख कारण हैं। https://agriculture.hp.gov.in/
प्रशासन की तैयारियां
जिला प्रशासन ने सेब सीजन को सुचारू बनाने के लिए निम्नलिखित तैयारियां की हैं:
- परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करना
- मालभाड़ा दरों में स्थिरता बनाए रखना
- श्रमिकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना
- नियंत्रण कक्ष की स्थापना
- यातायात व्यवस्था का प्रबंधन
उपायुक्त ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि सेब सीजन के दौरान बागवानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो तथा परिवहन और विपणन व्यवस्था सुचारू रहे।
भविष्य की चुनौतियां
शिमला के सेब बागवानों के सामने कई चुनौतियां खड़ी हैं:
- जलवायु परिवर्तन: लगातार बदलते मौसम पैटर्न से उत्पादन प्रभावित हो रहा है।
- मजदूरों की कमी: मजदूरों की उपलब्धता और बढ़ती लागत आने वाले सीजन में बड़ा मुद्दा बन सकती है।
- उत्पादन लागत: मजदूरों की बढ़ती दिहाड़ी से उत्पादन लागत बढ़ने की आशंका है।
- बाजार प्रतिस्पर्धा: वॉशिंगटन और अन्य विदेशी सेबों से प्रतिस्पर्धा।
निष्कर्ष
2026 में शिमला जिले के सेब किसानों के लिए मिश्रित परिणाम रहे हैं। उत्पादन में भारी गिरावट के बावजूद, मंडी में ऊंची कीमतों ने किसानों को कुछ राहत दी है। जिन किसानों ने उच्च गुणवत्ता वाले सेब उत्पादित किए हैं और प्राकृतिक खेती अपनाई है, उन्हें बेहतर लाभ मिला है।













