संजौली जाम से मरीजों की मुश्किलें बढ़ीं

संजौली जाम

संजौली जाम: मरीजों की जान पर भारी

शिमला के संजौली क्षेत्र में रोज़ाना लगने वाला ट्रैफिक जाम अब सिर्फ़ असुविधा नहीं, बल्कि मरीजों की जान के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के बीच का सफर, जो सामान्य दिनों में करीब 20 मिनट में पूरा हो जाता है, जाम के कारण 1 से 1.5 घंटे तक खिंच रहा है।

मामला क्या है

यह समस्या संजौली-ढली टनल मार्ग पर यातायात दबाव बढ़ने से और गंभीर हो गई है। एंबुलेंस, डॉक्टरों की गाड़ियाँ, मरीजों के परिजन और स्थानीय निवासी सभी इस जाम से परेशान हैं, जबकि आपात स्थिति में हर मिनट की देरी जोखिम बढ़ाती है।

मरीजों पर असर

सबसे बड़ा असर उन मरीजों पर पड़ रहा है जिन्हें IGMC से चमियाना सुपर स्पेशलिटी अस्पताल रेफर किया जाता है। हार्ट अटैक, स्ट्रोक, दुर्घटना या गंभीर आपात स्थिति वाले मरीजों के लिए यह देरी इलाज की सफलता और असफलता के बीच फर्क बन सकती है।

एंबुलेंस भी फंसी

रिपोर्टों के मुताबिक कई बार एंबुलेंस भी ट्रैफिक में फंस जाती है, जिससे मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। शिमला जैसे पहाड़ी शहर में सड़क संकरी होने और वैकल्पिक रूट सीमित होने के कारण यह समस्या और भी खतरनाक हो जाती है।

कोर्ट की चिंता

इस मुद्दे पर जनहित याचिका भी दायर की गई है और अदालत ने मरीजों की निर्बाध आवाजाही को लेकर चिंता जताई है। सुनवाई में सुझाव दिया गया कि संजौली से ढली टनल तक सुबह 8:30 बजे से रात 9:15 बजे के बीच वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाए, हालांकि इस पर सरकार और विभाग का जवाब मांगा गया है।

क्यों बढ़ा जाम

संजौली और आसपास के क्षेत्रों में लगातार बढ़ते वाहन, सड़क किनारे अव्यवस्थित पार्किंग, संकरा मार्ग और निर्माण गतिविधियाँ जाम की मुख्य वजह मानी जा रही हैं। ऊपर से अगर बारिश या भूस्खलन जैसी स्थिति बन जाए, तो यह समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है।

प्रशासन से उम्मीद

स्थानीय लोगों और याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि अस्पताल रूट को प्राथमिकता दी जाए और ट्रैफिक को वैज्ञानिक ढंग से नियंत्रित किया जाए। भट्ठाकुफर से चमियाना तक सुरक्षित और निर्बाध मार्ग बनाने, रिटेनिंग वॉल, डक्ट और बेहतर ट्रैफिक मैनेजमेंट की भी जरूरत बताई गई है।

आगे क्या जरूरी है

इस समस्या का समाधान सिर्फ़ पुलिस की तैनाती से नहीं होगा, बल्कि स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार, पार्किंग नियंत्रण और अस्पताल मार्गों के लिए विशेष योजना से ही संभव है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह जाम हर आपात मरीज के लिए खतरा बना रहेगा।

FAQ

Q1. संजौली में जाम से सबसे ज्यादा किसे परेशानी हो रही है?
A1. मरीजों, एंबुलेंस, डॉक्टरों और अस्पताल जाने वाले लोगों को।

Q2. सामान्य सफर कितना देर का और जाम में कितना लंबा हो रहा है?
A2. सामान्य 20 मिनट का रास्ता जाम में 1 से 1.5 घंटे तक लग रहा है।

Q3. क्या इस मामले पर कोर्ट में सुनवाई हुई है?
A3. हां, अदालत ने चिंता जताई है और सरकार से जवाब भी मांगा गया है।

Q4. क्या बारिश भी जाम की समस्या बढ़ाती है?
A4. हां, बारिश और भूस्खलन की स्थिति में सड़कें और अधिक बाधित हो सकती हैं।

निष्कर्ष

संजौली का ट्रैफिक जाम अब शिमला की रोज़मर्रा की समस्या नहीं, बल्कि एक स्वास्थ्य-सुरक्षा संकट बन चुका है। मरीजों की जान बचाने के लिए अस्पताल रूट पर तुरंत और ठोस ट्रैफिक प्रबंधन जरूरी है।

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