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हिमाचल में PMGSY बजट बढ़ा, अब सड़क निर्माण पर मिलेगा 1.60 करोड़ प्रति किमी
हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण सड़कों के निर्माण को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत अब सड़क निर्माण के लिए प्रति किलोमीटर बजट 90 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.60 करोड़ रुपये तक कर दिया गया है। यह बढ़ोतरी पहाड़ी राज्य की भौगोलिक चुनौतियों, बढ़ती निर्माण लागत और दुर्गम इलाकों में सड़क कार्यों को गति देने के उद्देश्य से की गई है।
इस निर्णय को हिमाचल के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि राज्य में सड़क निर्माण अक्सर ढलान, भूस्खलन, पहाड़ी कटिंग, पुलों की जरूरत और परिवहन लागत के कारण महंगा पड़ता है। पहले जो बजट कई परियोजनाओं के लिए अपर्याप्त साबित हो रहा था, अब उसके बढ़ने से लंबे समय से रुकी हुई ग्रामीण सड़क परियोजनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद है।
क्या है नया फैसला
केंद्र सरकार ने PMGSY चरण-4 के तहत हिमाचल प्रदेश में सड़क निर्माण के लिए संशोधित प्रावधान लागू करने का संकेत दिया है। अब निर्माण की प्रति किलोमीटर लागत के लिए 1 करोड़ 60 लाख रुपये तक का प्रावधान रहेगा, जबकि पहले यह राशि 90 लाख रुपये थी। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने यह मुद्दा केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के समक्ष उठाया था, जिसके बाद यह राहत मिली।
इस बढ़ोतरी को सरकार ने बढ़ती निर्माण लागत के अनुरूप कदम बताया है। खासतौर पर पहाड़ी रास्तों में कटिंग, retaining walls, drainage, culverts और बार-बार होने वाले repair work की वजह से मूल बजट कम पड़ रहा था। अब संशोधित राशि से परियोजनाओं की गुणवत्ता और समयबद्धता दोनों में सुधार की उम्मीद है।
हिमाचल के लिए क्यों अहम
हिमाचल में सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि जीवनरेखा मानी जाती हैं। ग्रामीण इलाकों, ऊंचे पहाड़ी गांवों, पर्यटन क्षेत्रों, अस्पतालों, स्कूलों और बाजारों को जोड़ने में PMGSY की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में बजट बढ़ने से दुर्गम क्षेत्रों में connectivity बेहतर होगी और लोगों की रोजमर्रा की दिक्कतें कम हो सकती हैं।
राज्य में कई ऐसी बस्तियां हैं जहां सड़क पहुंच अभी भी सीमित है या मौसमी व्यवधानों से बार-बार टूट जाती है। अतिरिक्त बजट से सड़क निर्माण के साथ-साथ टिकाऊ निर्माण, बेहतर materials, और लंबे समय तक चलने वाली infrastructure planning संभव होगी।
294 सड़कों की योजना
PMGSY चरण-4 के तहत हिमाचल प्रदेश में कुल 294 सड़कों के निर्माण की योजना है। केंद्र ने इस चरण के लिए 2247 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इनमें से 235 सड़कों के टेंडर अवार्ड हो चुके हैं, लेकिन 59 सड़कों के लिए अभी तक ठेकेदारों की ओर से पर्याप्त रुचि नहीं दिखाई गई है।
सबसे ज्यादा सड़कें शिमला जिले से संबंधित बताई गई हैं। कुछ परियोजनाओं में single tender आने के कारण टेंडर रद्द करने पड़े, जबकि कई स्थानों पर ठेकेदार पांच वर्षों के मेंटेनेंस दायित्व की वजह से आगे नहीं आ रहे हैं।
टेंडर में दिक्कत क्यों
सड़क निर्माण के टेंडर को लेकर सबसे बड़ी समस्या रखरखाव की लंबी जिम्मेदारी बताई जा रही है। PMGSY के नियमों के तहत ठेकेदारों को केवल निर्माण नहीं, बल्कि पांच साल तक maintenance भी संभालना होता है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन, बारिश और सड़क क्षति के जोखिम के कारण कई ठेकेदार इन परियोजनाओं में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
इसी वजह से लोक निर्माण विभाग को कई स्थानों पर दोबारा टेंडर आमंत्रित करने पड़े हैं। विभागीय अधिकारियों को संशोधित वित्तीय प्रावधानों के अनुसार जल्द से जल्द अगली टेंडर प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सड़क निर्माण में रुकावट दूर हो सके। https://shimlakhabar.com/
सड़क गुणवत्ता की स्थिति
ताज़ा गुणवत्ता मूल्यांकन रिपोर्ट में हिमाचल प्रदेश को पहाड़ी राज्यों में अच्छा स्थान मिला है। जून 2026 की रिपोर्ट के अनुसार 1029 सड़क परियोजनाओं में से केवल 20 काम असंतोषजनक पाए गए, जिससे राज्य की सड़क निर्माण गुणवत्ता को बेहतर श्रेणी में रखा गया। https://ddnews.gov.in/cabinet-approves-continuation-of-pmgsy-iii-till-march-2028-new-budget-of-rs-83977-crore-set-aside/
यह संकेत देता है कि हिमाचल में सड़क परियोजनाओं की गुणवत्ता पर भी काम हुआ है। ऐसे में बजट बढ़ने का असर केवल मात्रा पर नहीं, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता और लंबे समय तक टिकने वाली road infrastructure पर भी पड़ सकता है।
ग्रामीण विकास पर असर
ग्रामीण सड़कें किसी भी पहाड़ी राज्य के लिए सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक विकास का आधार होती हैं। बेहतर सड़कें होने से किसानों को अपनी उपज बाजार तक ले जाने में आसानी होगी, छात्रों को स्कूल-कॉलेज तक पहुंचने में सुविधा होगी और स्वास्थ्य सेवाओं तक समय पर पहुंच बेहतर होगी।
पर्यटन आधारित क्षेत्रों में भी इसका सीधा फायदा मिलेगा। शिमला, मंडी, कुल्लू, कांगड़ा, चंबा और डलहौजी जैसे क्षेत्रों में सड़क संपर्क बेहतर होने से पर्यटकों की आवाजाही सुगम होगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।
प्रशासन की चुनौती
हालांकि बजट बढ़ना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन असली चुनौती इसके समय पर उपयोग और क्रियान्वयन की होगी। पहाड़ी भूगोल, मौसम की मार, भूमि अधिग्रहण की जटिलता, ट्रांसपोर्ट लागत और ठेकेदारों की सीमित भागीदारी इन परियोजनाओं की गति को प्रभावित कर सकती है।
अब प्रशासन और विभाग दोनों के सामने यह जिम्मेदारी है कि संशोधित बजट का उपयोग पारदर्शी और तेज तरीके से हो। अगर टेंडर प्रक्रिया समय पर पूरी हो गई, तो आने वाले महीनों में कई ग्रामीण इलाकों में सड़क निर्माण का काम स्पष्ट रूप से बढ़ सकता है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर हिमाचल प्रदेश के लिए PMGSY बजट में बढ़ोतरी एक महत्वपूर्ण विकासात्मक फैसला है। प्रति किलोमीटर 90 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.60 करोड़ रुपये किए जाने से पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क निर्माण की वास्तविक लागत को स्वीकार किया गया है।
यह कदम न सिर्फ लंबित परियोजनाओं को गति देगा, बल्कि हिमाचल के ग्रामीण और दुर्गम इलाकों में संपर्क, विकास, रोजगार और जीवन-स्तर सुधारने में भी मदद करेगा। अगर क्रियान्वयन मजबूत रहा, तो यह फैसला राज्य के सड़क नेटवर्क के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है।













