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Himachal Financial Crisis: CM Sukhu ने केंद्र पर लगाए गंभीर आरोप, 1,500 करोड़ की राहत और RDG अनुदान पर उठाए बड़े सवाल
9 अगस्त 2026, रविवार को हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य की गंभीर वित्तीय स्थिति को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2025 में आपदा प्रभावित हिमाचल के लिए 1,500 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की घोषणा की थी, लेकिन यह राशि अभी तक प्रदेश को नहीं मिली है। इसके साथ ही राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद होने से हिमाचल को हर साल करीब 8 से 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
पीएम की 1,500 करोड़ की घोषणा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 सितंबर 2025 को हिमाचल में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से हुए नुकसान का जायजा लेने के बाद 1,500 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की घोषणा की थी। यह सहायता आपदा प्रभावित हिमाचल के लिए घोषित विशेष वित्तीय मदद थी। हालांकि मुख्यमंत्री सुक्खू का कहना है कि प्रधानमंत्री की ओर से घोषित 1,500 करोड़ रुपये की सहायता अभी तक प्रदेश को नहीं मिली है।
सीएम सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार इस मुद्दे को केंद्र के समक्ष लगातार उठाती रही है। उन्होंने जुलाई 2026 में भी भाजपा के सांसदों से सवाल किया था कि प्राकृतिक आपदा के बाद प्रधानमंत्री की ओर से हिमाचल के लिए घोषित 1,500 करोड़ रुपये की सहायता राशि आखिर कहां है। उन्होंने कहा कि भाजपा के चारों सांसदों ने इस राशि को दिलाने और हिमाचल के हितों की केंद्र सरकार के समक्ष कितनी बार आवाज उठाई, यह जनता को पूछना चाहिए।
RDG बंद होने का बड़ा नुकसान
मुख्यमंत्री के अनुसार, राजस्व घाटा अनुदान यानी आरडीजी बंद होने से हिमाचल को हर साल करीब 8 से 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के बाद 2026-27 से राज्यों के लिए आरडीजी की व्यवस्था समाप्त हो गई है। हिमाचल लंबे समय से इस अनुदान पर निर्भर रहा है और इसके बंद होने से राज्य सरकार के वित्तीय संसाधनों पर दबाव बढ़ने की बात कहती रही है।
सुक्खू ने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य की भौगोलिक परिस्थितियां अलग हैं। यहां सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर खर्च अधिक होता है। ऐसे में केंद्र से मिलने वाली वित्तीय सहायता प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। RDG खत्म होने से पहले ही फरवरी 2026 में कैबिनेट बैठक में वित्त विभाग ने चेतावनी दी थी कि अगर यह अनुदान बहाल नहीं हुआ तो सरकार के लिए कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (DA) और एरियर का भुगतान करना लगभग असंभव हो जाएगा।
वित्तीय संकट की गंभीर स्थिति
मुख्यमंत्री सुक्खू ने स्पष्ट किया कि RDG बंद होने और केंद्र से मिलने वाली सहायता न मिलने से हिमाचल प्रदेश गंभीर वित्तीय दबाव का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान (RDG) के बंद होने से राज्य की वित्तीय स्थिति बेहद नाजुक हो गई है।
सरकार पर पहले से ही पिछले वेतन आयोग का करीब 8,500 करोड़ रुपये का एरियर और डीए/डीआर का लगभग 5,000 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। अनुदान के बिना इन भुगतानों को करना मुश्किल होगा। आर्थिक तंगी के चलते नई सरकारी नौकरियों पर पूरी तरह से रोक लग सकती है। साथ ही, दो साल से अधिक समय से खाली पड़े पदों को खत्म करने जैसे कड़े फैसले भी लिए जा सकते हैं।
विपक्ष से एकजुट होने की अपील
सीएम सुक्खू ने कहा कि प्रदेश के हित में सभी राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों को एकजुट होकर केंद्र के समक्ष हिमाचल का पक्ष मजबूती से रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमाचल की जनता के अधिकार और प्रदेश की आर्थिक मजबूती के लिए विपक्ष का साथ और सहयोग जरूरी है। यह लड़ाई किसी एक पार्टी की नहीं, बल्कि पूरे हिमाचल के अस्तित्व की है।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष से स्पष्ट किया कि यह मुद्दा किसी एक राजनीतिक दल का नहीं है, बल्कि यह हिमाचल के लोगों के कल्याण और प्रदेश के विकास से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि सभी दलों को मिलकर केंद्र सरकार के समक्ष हिमाचल के हितों की पैरवी करनी चाहिए।
अन्य वित्तीय मांगें
मुख्यमंत्री सुक्खू ने जून 2026 में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के दौरान हिमाचल के कई वित्तीय मुद्दे उठाए थे। उन्होंने सतलुज-ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) से हिमाचल प्रदेश के करीब 4 हजार करोड़ रुपये के बकाया भुगतान का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद यह राशि अभी तक राज्य को नहीं मिली है।mpbreakingnews
सीएम ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद पिछले आठ वर्षों में हिमाचल प्रदेश को लगभग 25 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसके अलावा उन्होंने जलविद्युत परियोजनाओं में राज्य के अधिकारों की सुरक्षा, कांगड़ा के गग्गल एयरपोर्ट के विस्तार, हरित ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा देने और चंद्रभागा-रावी-ब्यास लिंक परियोजना में हिमाचल के हितों की रक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय भी मजबूती से उठाए।
केंद्र से अधिक सहायता की मांग
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि हिमाचल प्रदेश की मौजूदा आर्थिक स्थिति का विस्तृत अध्ययन करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाए। उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर बड़ा असर पड़ा है।
सीएम सुक्खू ने कहा कि केंद्र से अब तक मिले 25 हजार करोड़ रुपये प्रदेश की जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसलिए इस राशि को बढ़ाकर 50 हजार करोड़ रुपये किया जाना चाहिए, ताकि राज्य आर्थिक चुनौतियों से बाहर निकल सके। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए केंद्र सरकार को तत्काल कदम उठाने चाहिए।
RDG बंद होने के संभावित प्रभाव
RDG बंद होने से हिमाचल प्रदेश में कई गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। वित्त विभाग ने फरवरी 2026 में संस्थानों के निजीकरण की भी संभावना जताई थी। घाटे में चल रहे सरकारी बोर्ड, निगमों और परियोजनाओं को निजी हाथों में सौंपने की नौबत आ सकती है। इसके अलावा, ओल्ड पेंशन स्कीम की जगह यूनिफाइड पेंशन स्कीम पर भी विचार करना पड़ सकता है।
हिमाचल प्रदेश में RDG बंद होने से पहले ही राज्य सरकार को वेतन, पेंशन और सब्सिडी जैसे मामलों में कठिनों का सामना करना पड़ रहा है। कैबिनेट ने इस मुद्दे पर मंथन किया और पाया कि RDG समाप्ति से अर्थव्यवस्था, वेतन, पेंशन पर गंभीर असर पड़ेगा। https://shimlakhabar.com/
आर्थिक संकट का इतिहास
मोदी सरकार ने केंद्रीय बजट में हिमाचल प्रदेश और अन्य पहाड़ी राज्यों की रैवन्यू डिफेसिट ग्रांट बंद कर दी थी, जिससे हिमाचल प्रदेश को 40 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। कांग्रेस सरकार ने इसकी भरपाई के लिए जलविद्युत परियोजनाओं पर भूमि कर लगाने जैसे उपाय किए थे।
फरवरी 2026 में RDG बंद होने के बाद से हिमाचल प्रदेश एक बड़े आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है। रविवार को हुई कैबिनेट बैठक में वित्त विभाग की एक विस्तृत प्रेजेंटेशन ने इस संकट की भयावह तस्वीर पेश की थी। इस गंभीर स्थिति पर चर्चा के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में भाजपा विधायकों की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया था।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री सुक्खू ने केंद्र सरकार से दोहरी मांग की है – एक तो पीएम द्वारा घोषित 1,500 करोड़ रुपये की आपदा राहत तुरंत जारी की जाए और दूसरा RDG को बहाल किया जाए या वैकल्पिक वित्तीय सहायता प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक और आर्थिक विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार को विशेष पैकेज की घोषणा करनी चाहिए।
सीएम ने चेतावनी दी है कि अगर केंद्र से त्वरित वित्तीय सहायता नहीं मिली तो हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था और भी संकट में आ सकती है। राज्य सरकार सभी राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों से एकजुट होकर केंद्र के समक्ष हिमाचल के हितों की पैरवी करने की अपील कर रही है।













