Himachal Assembly Protest 2026: तख्तियों के साथ प्रदर्शन, राष्ट्रगान-वंदे मातरम विवाद और पंचायती राज चुनावों पर सियासी जंग

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Himachal Assembly Protest 2026: तख्तियों के साथ प्रदर्शन, राष्ट्रगान-वंदे मातरम विवाद और पंचायती राज चुनावों पर सियासी जंग

शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन कार्यवाही शुरू होने से पहले सत्तापक्ष कांग्रेस और विपक्ष भाजपा विधानसभा परिसर में आमने-सामने आ गए। दोनों दलों के विधायकों ने हाथों में तख्तियां उठाकर जमकर नारेबाजी की और एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए। एक तरफ कांग्रेस ने भाजपा पर राष्ट्रगान के अपमान का आरोप लगाया, तो वहीं भाजपा ने पंचायती राज संस्थाओं के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव लटकाने और राजनीतिक शोषण का मुद्दा उठाया।

विधानसभा परिसर में तख्तियों के साथ प्रदर्शन

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अगुवाई में कांग्रेस विधायक दल ने विधानसभा परिसर में प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेस विधायकों ने हाथों में तख्तियां उठाईं और भाजपा के खिलाफ नारे लगाए। कांग्रेस के नारों में “पेपर चोर कहां मिलेंगे, बीजेपी के दफ्तर में…” जैसे नारे शामिल थे, जो पिछले कुछ समय से चल रहे पेपर लीक और भर्ती घोटाले के मुद्दों को इंगित करते हैं।

दूसरी तरफ, भाजपा विधायक दल ने भी कार्यवाही शुरू होने से पहले विधानसभा परिसर में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। भाजपा विधायकों ने हाथों में तख्तियां उठाकर पंचायती राज संस्थाओं के राजनीतिक शोषण, अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चुनाव लटकाने और युवाओं को रोजगार न देने जैसे मुद्दों पर जमकर नारेबाजी की।

राष्ट्रगान बनाम वंदे मातरम: सदन के अंदर भी टकराव

यह टकराव सिर्फ परिसर तक सीमित नहीं रहा। मानसून सत्र के पहले दिन ही सदन के अंदर भी राष्ट्रगान और वंदे मातरम को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। सत्र की शुरुआत राष्ट्रगान से हुई, लेकिन तुरंत बाद भाजपा के विधायकों ने वंदे मातरम भी शुरू में गाए जाने की मांग कर दी।

स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने स्पष्ट किया कि संसद और हिमाचल विधानसभा में परंपरा के अनुसार सत्र की शुरुआत राष्ट्रगान से होती है और अंत में वंदे मातरम गाया जाता है। लेकिन भाजपा के विधायक इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हुए और सदन के भीतर नारेबाजी शुरू कर दी। इसके जवाब में कांग्रेस के विधायकों ने भी पलटवार किया और भाजपा पर राष्ट्रगान का अपमान करने का आरोप लगाया।

तनाव इतना बढ़ गया कि स्पीकर को सदन को उसी दिन के लिए स्थगित करना पड़ा। पहले दिन की कार्यवाही महज 10–12 मिनट में ही धुल हो गई।

कांग्रेस का आरोप: भाजपा राष्ट्रगान का अपमान कर रही है

कांग्रेस ने इस पूरे विवाद को लेकर भाजपा पर कड़ा हमला बोला। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि भाजपा के विधायकों ने राष्ट्रगान के बाद वंदे मातरम को लेकर जो हंगामा किया, वह दरअसल राष्ट्रगान के अपमान जैसा है।

राज्य कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने कहा कि भाजपा जानबूझकर वंदे मातरम का मुद्दा उठाकर सदन में अपने ऊपर आने वाले सवालों से ध्यान हटाना चाहती है। कांग्रेस विधायकों ने सदन के बाहर भी “चंदा चोर”, “राम के नाम पर खा गए चंदा” जैसे नारे लगाकर भाजपा पर निशाना साधा।

भाजपा का पलटवार: पंचायती राज चुनाव लटकाने का आरोप

भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर पंचायती राज संस्थाओं के राजनीतिक शोषण का गंभीर आरोप लगाया। भाजपा विधायकों का कहना है कि पंचायतों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव जानबूझकर लटकाए जा रहे हैं, ताकि सरकार इन संस्थाओं को कमजोर कर सके। https://shimlakhabar.com/

इसके अलावा भाजपा ने रोजगार के वादों को पूरा न करने, पेपर लीक मामले में दोषियों पर कार्रवाई न करने और महंगाई जैसे मुद्दों पर भी सरकार को घेरा। भाजपा विधायक रणधीर शर्मा के नेतृत्व में विधायकों ने युवाओं को दिए गए रोजगार के वादों को पूरा न करने का मुद्दा भी उठाया।

पंचायती राज चुनाव: क्यों बना है बड़ा मुद्दा?

हिमाचल में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव समय पर होना और फिर उनके अध्यक्ष-उपाध्यक्ष का चुनाव जल्दी कराना एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि सत्ताधारी पार्टी इन पदों पर अपने लोगों को बिठाने के लिए प्रक्रिया को धीमा कर रही है या फिर दबाव बना रही है।

दूसरी तरफ, सरकार का पक्ष है कि प्रक्रिया कानून के मुताबिक चल रही है और किसी भी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं किया जा रहा। लेकिन विधानसभा में इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस होती रही है।

मानसून सत्र का माहौल: हंगामे से शुरूआत

हिमाचल विधानसभा का मानसून सत्र 21 अगस्त 2026 से शुरू हुआ था, लेकिन पहले दिन ही वंदे मातरम विवाद ने सदन की कार्यवाही को ठप्पा कर दिया। दूसरे दिन से पहले ही दोनों दलों का विधानसभा परिसर में तख्तियों के साथ प्रदर्शन इस बात का संकेत देता है कि पूरा सत्र काफी हद तक हंगामे और टकराव के साये में गुजर सकता है।

सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने मुद्दों को लेकर आक्रामक नजर आ रहे हैं। कांग्रेस के लिए भ्रष्टाचार, पेपर लीक और रोजगार के मुद्दे प्रमुख हैं, जबकि भाजपा के लिए पंचायती राज, रोजगार के वादे और वंदे मातरम जैसे प्रतीकात्मक मुद्दे अहम हैं।

विधायकों के नारे और तख्तियां: सियासी संदेश

दोनों दलों की तख्तियों और नारों में साफ संदेश थे:

  • कांग्रेस की तरफ से:
    • “पेपर चोर कहां मिलेंगे, बीजेपी के दफ्तर में…”
    • “चंदा चोर”, “राम के नाम पर खा गए चंदा”
    • भाजपा पर राष्ट्रगान का अपमान करने का आरोप
  • भाजपा की तरफ से:
    • पंचायती राज संस्थाओं के राजनीतिक शोषण का विरोध
    • अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव लटकाने का विरोध
    • रोजगार के वादों को पूरा न करने का विरोध

इन नारों और तख्तियों ने साफ कर दिया कि इस सत्र में दोनों पक्ष एक-दूसरे को घेरने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

आगे क्या उम्मीद करें?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों पक्ष थोड़ा लचीला रुख नहीं अपनाते, तो मानसून सत्र की महत्वपूर्ण कार्यवाही – बजट पूरक मांगें, नए विधेयक, नीतिगत बहसें – प्रभावित हो सकती हैं।

सत्तापक्ष चाहता है कि सदन में भ्रष्टाचार, रोजगार और विकास के मुद्दों पर चर्चा हो, जबकि विपक्ष पंचायती राज, रोजगार के वादों और प्रतीकात्मक मुद्दों (जैसे वंदे मातरम) को लेकर सरकार को घेरना चाहती है। https://hpvs.neva.gov.in/

अगले कुछ दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या स्पीकर और दोनों दलों के नेता किसी तरह का समझौता कर सदन की कार्यवाही को पटरी पर ला पाते हैं, या फिर पूरा सत्र हंगामे और स्थगन की भेंट चढ़ जाता है।

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