Sarvaangeen Krishi Samadhan Foundation द्वारा वन महोत्सव-2026: चंबा में 300 पौधों का वृक्षारोपण

Sarvaangeen Krishi Samadhan Foundation द्वारा वन महोत्सव

Sarvaangeen Krishi Samadhan Foundation द्वारा वन महोत्सव-2026: चंबा में 300 पौधों का वृक्षारोपण

चंबा: स्वतंत्रता दिवस पौधारोपण

सर्वांगीण कृषि समाधान फाउंडेशन ने 15 अगस्त 2026 को चंबा के चुराह क्षेत्र, ब्लॉक तीसा की ग्राम पंचायत टिकरीगढ़ में 300 पौधे लगाए। हिमाचल वन विभाग और SBI चंबा के सहयोग से हुए इस अभियान में देवदार, बान और अखरोट जैसे पौधे रोपे गए, जिससे स्थानीय हरियाली और पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा मिला।

पृष्ठभूमि और उद्देश्य

शिमला में सफलतापूर्वक संपन्न पौधारोपण अभियान के बाद, सर्वांगीण कृषि समाधान फाउंडेशन ने हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में पर्यावरण संरक्षण की अपनी मुहिम को आगे बढ़ाया। 15 अगस्त 2026, यानी स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर आयोजित इस वृक्षारोपण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में हरियाली बढ़ाना, पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहित करना और स्थानीय समुदाय को पौधों की नियमित देखभाल एवं दीर्घकालिक संरक्षण के प्रति जागरूक करना रहा।

फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शिमला के बाद चंबा के चुराह क्षेत्र में 300 पौधे लगाना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, और संस्था भविष्य में भी हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में इस प्रकार की मुहिम को जारी रखेगी।

कार्यक्रम का स्थान और समय

यह वृक्षारोपण अभियान हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के चुराह विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ब्लॉक तीसा की ग्राम पंचायत टिकरीगढ़ में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की तिथि 15 अगस्त 2026 थी, जो भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया गया। स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेना इस बात का प्रतीक है कि देश की आज़ादी के साथ-साथ प्रकृति की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

लगाए गए पौधों की संख्या और प्रजातियाँ

इस अभियान के दौरान कुल लगभग 300 पौधे लगाए गए। पौधों की प्रजातियों में स्थानीय जलवायु और पारिस्थितिकी के अनुकूल देवदार, बान (बाँस), अखरोट सहित विभिन्न प्रजातियाँ शामिल थीं। देवदार हिमाचल के पहाड़ी इलाकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह न केवल मिट्टी के कटाव को रोकता है बल्कि स्थानीय जैव विविधता को भी बनाए रखता है। बाँस तेजी से बढ़ने वाली प्रजाति है जो कार्बन अवशोषण में सहायक होती है, जबकि अखरोट के पेड़ दीर्घकालिक आर्थिक लाभ प्रदान करते हैं और स्थानीय किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकते हैं।

सहयोगी संस्थाएँ और प्रमुख अतिथि

इस अभियान में हिमाचल प्रदेश वन विभाग और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। SBI चंबा के Chief Manager श्री संजय मोहन ने कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाई और पौधारोपण में अपना योगदान दिया। वन विभाग की ओर से Forest Guard श्री नेक राम और वन मित्र शालिनी शर्मा उपस्थित रहे, जिन्होंने तकनीकी मार्गदर्शन और पौधों के उचित रोपण की व्यवस्था सुनिश्चित की। https://agriculture.hp.gov.in/

कार्यक्रम को चुराह के विधायक श्री हंस राज जी का सहयोग एवं मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। विधायक हंस राज ने स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला और फाउंडेशन के प्रयासों की सराहना की। चुराह विधानसभा क्षेत्र में इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करना स्थानीय युवाओं और समुदाय को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाने में सहायक सिद्ध होगा।

कार्यक्रम में भागीदारी

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित इस अभियान में फाउंडेशन के पदाधिकारियों, स्वयंसेवकों एवं स्थानीय लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। स्थानीय निवासियों, स्कूली बच्चों, युवाओं और महिलाओं ने बड़ी संख्या में उपस्थिति दर्ज कराई और पौधे लगाने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। इस व्यापक भागीदारी ने यह सुनिश्चित किया कि पौधारोपण केवल एक औपचारिक कार्यक्रम न रहे, बल्कि समुदाय की सामूहिक जिम्मेदारी बन जाए।

संकल्प और भविष्य की योजनाएँ

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल एवं संरक्षण का संकल्प लिया। फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने कहा कि पौधा लगाना केवल शुरुआत है; असली चुनौती उसे बड़ा करने और भविष्य की पीढ़ियों तक पहुँचाने में है। इसलिए, स्थानीय समुदाय को पौधों की सिंचाई, सुरक्षा और देखभाल के लिए प्रेरित करना और प्रशिक्षित करना आवश्यक है। https://shimlakhabar.com/

फाउंडेशन ने भविष्य की योजनाओं के तहत हिमाचल प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी प्रकार के वृक्षारोपण अभियान आयोजित करने का संकल्प दोहराया। संस्था का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में हजारों पौधे लगाकर हिमाचल को और अधिक हरियाली से सराबोर किया जाए।

फाउंडेशन का संदेश

फाउंडेशन ने इस अवसर पर एक प्रेरणादायक संदेश भी दिया:

“शिमला में सफल पौधारोपण के बाद 15 अगस्त को चंबा में 300 पौधों के साथ हरियाली का संकल्प—एक पौधा लगाएँ, उसकी देखभाल करें और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरा-भरा हिमाचल बनाएँ।”

यह संदेश न केवल इस कार्यक्रम का सार प्रस्तुत करता है,

बल्कि भविष्य के लिए एक रोडमैप भी तैयार करता है।

पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव

चंबा जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में वृक्षारोपण के दीर्घकालिक लाभ बहुआयामी हैं:

  • मिट्टी संरक्षण: पेड़ों की जड़ें मिट्टी को बांधे रखती हैं और भूस्खलन जैसे प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को कम करती हैं।
  • जल संरक्षण: वनस्पति जल चक्र को संतुलित रखती है और भूजल स्तर को बनाए रखने में सहायक होती है।

  • कार्बन अवशोषण: पेड़ वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मदद करते हैं।
  • आर्थिक लाभ: अखरोट जैसे फलदार पेड़ स्थानीय किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकते हैं।
  • सामाजिक जागरूकता: इस प्रकार के कार्यक्रम स्थानीय समुदाय, विशेषकर युवाओं और बच्चों, को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाते हैं।

निष्कर्ष

15 अगस्त 2026 को चंबा के चुराह क्षेत्र में आयोजित यह वृक्षारोपण अभियान न केवल 300 पौधों के रोपण का कार्यक्रम था, बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक और पर्यावरणीय आंदोलन की शुरुआत थी। सर्वांगीण कृषि समाधान फाउंडेशन, हिमाचल वन विभाग, SBI चंबा और स्थानीय समुदाय के सामूहिक प्रयासों से यह सुनिश्चित हुआ कि लगाए गए पौधे केवल संख्या न रहें, बल्कि भविष्य में घने वृक्ष बनकर हिमाचल की हरियाली और पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें।

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