सोलन में मशरूम पर मंडराया कोवेव रोग का खतरा

सोलन में मशरूम पर मंडराया कोवेव रोग का खतरा

सोलन में मशरूम पर मंडराया कोवेव रोग का खतरा: 20 फीसदी फसल नुकसान की आशंका, किसानों को अलर्ट

हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में लगातार बारिश और बढ़ी हुई नमी ने मशरूम उत्पादकों की चिंता बढ़ा दी है। जिले में बटन और ढिंगरी मशरूम की फसल पर क्लेडोबोट्रियम फंगस से होने वाले कोवेव रोग का खतरा बढ़ गया है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार अगर शुरुआती स्तर पर रोग की पहचान और रोकथाम नहीं की गई, तो देशभर में करीब 20 फीसदी मशरूम फसल प्रभावित हो सकती है।

सोलन को देश के प्रमुख मशरूम उत्पादक क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां बड़ी संख्या में किसान और छोटे उद्यमी बटन, ढिंगरी और अन्य प्रकार के मशरूम का उत्पादन करते हैं। ऐसे में बरसात के मौसम में नमी बढ़ने से पैदा हुआ यह रोग किसानों की आमदनी और उत्पादन चक्र दोनों पर असर डाल सकता है। खुंब निदेशालय सोलन और विशेषज्ञों ने उत्पादकों को मशरूम इकाइयों में नमी नियंत्रित रखने तथा शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही रोकथाम के कदम उठाने की सलाह दी है।

बारिश और नमी बनी मुख्य वजह

मशरूम उत्पादन में तापमान और नमी का संतुलन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। बरसात के दौरान वातावरण में नमी बढ़ जाती है और मशरूम बैग या उत्पादन कक्ष में भी जरूरत से ज्यादा नमी जमा हो सकती है। इसी स्थिति में फंगस के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार इस बार सामान्य से अधिक बारिश और लगातार नम मौसम के कारण कोवेव रोग का दायरा बढ़ने की आशंका है।

कोवेव रोग का कारण क्लेडोबोट्रियम फंगस बताया गया है। यह फंगस अनुकूल वातावरण मिलने पर तेजी से फैल सकती है और एक संक्रमित मशरूम से आसपास मौजूद स्वस्थ मशरूम तक पहुंच सकती है। यदि उत्पादन इकाई में हवा का आवागमन कम हो या नमी लंबे समय तक बनी रहे, तो संक्रमण को नियंत्रित करना कठिन हो सकता है।

कैसे पहचानें कोवेव रोग

रोग की शुरुआत में मशरूम के ऊपर रुई जैसी सफेद फंगस दिखाई देने लगती है। यह सफेद परत धीरे-धीरे मशरूम की सतह और आसपास के हिस्से पर फैल सकती है। इसके बाद संक्रमित मशरूम कमजोर होकर सड़ना शुरू हो जाते हैं और रोग पास में मौजूद स्वस्थ मशरूम तक भी पहुंच सकता है।

किसानों के लिए जरूरी है कि वे रोजाना उत्पादन कक्ष और मशरूम बैग का निरीक्षण करें। अगर किसी बैग या मशरूम पर असामान्य सफेद वृद्धि, सड़न या तेजी से फैलती फफूंद दिखाई दे, तो उसे सामान्य फसल से अलग करके विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। शुरुआती पहचान से संक्रमण को बड़े क्षेत्र में फैलने से रोकने की संभावना बढ़ जाती है।

20 फीसदी नुकसान की आशंका

विशेषज्ञों ने देशभर में करीब 20 फीसदी मशरूम फसल प्रभावित होने की आशंका जताई है। यह अनुमान देश के विभिन्न हिस्सों में बरसात और नमी के कारण बढ़ते रोग के खतरे को देखते हुए है। सोलन जिले में नुकसान का वास्तविक स्तर अलग-अलग उत्पादन इकाइयों में नमी, तापमान, सफाई, वेंटिलेशन और रोग की शुरुआती पहचान पर निर्भर करेगा।

इसका अर्थ यह नहीं है कि सोलन की हर मशरूम इकाई में 20 फीसदी नुकसान निश्चित है। जिन उत्पादकों ने उत्पादन कक्ष में नमी नियंत्रित रखी है और संक्रमित हिस्सों को समय पर अलग किया है, वे बड़े नुकसान से बच सकते हैं। वहीं नए और छोटे उत्पादकों के लिए जोखिम अधिक हो सकता है, क्योंकि उनके पास नियंत्रित वातावरण और रोग निगरानी की पर्याप्त सुविधाएं हमेशा उपलब्ध नहीं होतीं।

किसानों को क्या सावधानी रखनी चाहिए

खुंब निदेशालय सोलन के विशेषज्ञों ने उत्पादकों को उत्पादन इकाइयों में नमी का स्तर नियंत्रित रखने की सलाह दी है। बारिश के दौरान अतिरिक्त नमी जमा न हो, इसके लिए कक्ष में उचित वेंटिलेशन और हवा के आवागमन पर ध्यान देना जरूरी है। हालांकि वेंटिलेशन करते समय बाहरी दूषित हवा, पानी की छींटों और गंदगी को उत्पादन कक्ष में प्रवेश करने से रोकना भी आवश्यक होगा।

किसानों को रोजाना मशरूम बैग, कैसिंग और उत्पादन क्षेत्र का निरीक्षण करना चाहिए। संक्रमित मशरूम या बैग को स्वस्थ फसल के पास रखने से संक्रमण तेजी से फैल सकता है। इसलिए संदिग्ध या संक्रमित सामग्री को अलग रखना और विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उसका निपटान करना जरूरी है।

उत्पादन इकाई में सफाई बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। फर्श, रैक, उपकरण और काम करने वाले स्थानों की नियमित सफाई की जानी चाहिए। किसानों को एक ही उपकरण को बिना साफ किए अलग-अलग बैग या कमरों में इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे फंगस फैलने की संभावना बढ़ सकती है।

विशेषज्ञों ने जारी की एडवाइजरी

बारिश और नमी को देखते हुए खुंब निदेशालय की ओर से उत्पादकों को समय-समय पर एडवाइजरी जारी की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसान किसी भी रोग के लक्षण को नजरअंदाज न करें और उपचार या रासायनिक नियंत्रण के लिए खुद से निर्णय लेने के बजाय कृषि विशेषज्ञों से सलाह लें। https://agriculture.hp.gov.in/en/home-english/

मशरूम का उत्पादन नियंत्रित वातावरण में होता है और अलग-अलग प्रजातियों, अवस्था तथा उत्पादन माध्यम के हिसाब से उपाय बदल सकते हैं। इसलिए किसी भी फफूंदनाशक या अन्य रसायन का इस्तेमाल कृषि विशेषज्ञ की सलाह और निर्धारित निर्देशों के अनुसार ही किया जाना चाहिए। गलत दवा, गलत मात्रा या गलत समय पर उपयोग से फसल को अतिरिक्त नुकसान हो सकता है।

नए उत्पादकों के लिए ज्यादा चुनौती

सोलन में मशरूम उत्पादन से जुड़ने वाले नए किसानों की संख्या बढ़ रही है। छोटे स्तर पर शुरू करने वाले कई उत्पादक उत्पादन कक्ष में तापमान और नमी की निगरानी के लिए पर्याप्त उपकरण नहीं लगा पाते। ऐसे उत्पादकों के लिए बरसात का मौसम अधिक जोखिमपूर्ण हो सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि नए किसान उत्पादन शुरू करने से पहले प्रशिक्षण लें और रोगों की प्राथमिक पहचान के बारे में जानकारी हासिल करें। मशरूम बैग खरीदते समय भी गुणवत्ता और स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए। संक्रमित सामग्री को उत्पादन इकाई में लाने से पूरी फसल प्रभावित हो सकती है। https://shimlakhabar.com/

बाजार और आमदनी पर असर

मशरूम की फसल में रोग फैलने का सीधा असर किसान की आमदनी पर पड़ता है। उत्पादन घटने से बाजार में आपूर्ति कम हो सकती है और किसानों को खराब या कम गुणवत्ता वाली फसल कम कीमत पर बेचनी पड़ सकती है। यदि संक्रमण बड़े स्तर पर फैलता है, तो उत्पादन लागत, मजदूरी और बिजली का खर्च निकलना भी मुश्किल हो सकता है।

सोलन के कई किसान मशरूम उत्पादन को मुख्य या अतिरिक्त आय के रूप में अपनाते हैं। ऐसे में रोग नियंत्रण केवल फसल बचाने का मामला नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और परिवार की आय से भी जुड़ा हुआ है। समय पर सलाह और निगरानी से किसानों को संभावित आर्थिक नुकसान से राहत मिल सकती है।

मौसम का आगे भी असर

मौसम विभाग की बारिश संबंधी चेतावनियों के बीच सोलन और आसपास के क्षेत्रों में आने वाले दिनों में नमी बनी रहने की संभावना है। लगातार बादल और बारिश मशरूम इकाइयों के भीतर वातावरण को नम रख सकते हैं। इसलिए किसानों को मौसम साफ होने का इंतजार करने के बजाय अभी से उत्पादन कक्षों की निगरानी और नमी प्रबंधन पर ध्यान देना होगा।

किसानों को अपने इलाके की कृषि मौसम सलाह, खुंब निदेशालय और स्थानीय कृषि अधिकारियों के निर्देशों का पालन करना चाहिए। मौसम में थोड़ी राहत मिलने पर भी यदि उत्पादन कक्ष में नमी बनी रहती है, तो रोग का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर सोलन में बारिश और बढ़ी हुई नमी के कारण मशरूम पर कोवेव रोग का खतरा गंभीर हो गया है। क्लेडोबोट्रियम फंगस से होने वाला यह रोग बटन और ढिंगरी मशरूम में तेजी से फैल सकता है और सफेद रुई जैसी परत के बाद फसल में सड़न शुरू हो सकती है।

देशभर में करीब 20 फीसदी फसल प्रभावित होने की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है, लेकिन समय पर पहचान, नियंत्रित नमी, बेहतर सफाई, पर्याप्त हवा और विशेषज्ञों की सलाह से नुकसान को सीमित किया जा सकता है। सोलन के मशरूम उत्पादकों के लिए फिलहाल सबसे बड़ा संदेश यही है—लक्षणों को नजरअंदाज न करें, संक्रमित सामग्री अलग रखें और किसी भी उपचार से पहले कृषि विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

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